Wednesday, November 23, 2016


Ghazal by Dr Sabir Panipati

aap aur ye naqab kay maa’ni
dosto’n se hiaab kay maa’ni

husn-o-ishq aap hi ki daulat hai
ham pe itna itaab kya maa’ni

ye gham-e-hijr dein kiski hai?
ye musalsal azaab kya maa’ni

gair ka ehtraam beshaq ho
ham se yeh iztinaab kya maa’ni

ho hi jaayega kuchh na kuchh e dil
is qadar iztraab kaya maa’ni

waada-e-magfirat slaamat hai
fikr-e-yom-ul-hisaab kya maa’ni

ahtraam-e-hyaat hai zaahid
itti’haame shraab kya maa’ni

gham ke haatho’n nidhaal hai “sabir”
zikr-e-she’r-o-shraab kya maa’ni

posted by ….Prem Lata Sharma

01/06/2012
ग़ज़ल


आप और ये नक़ाब क्या मा’नी ?
दोस्तों से हिजाब  क्या मा’नी ?

 हुस्न--इश्क़ आप ही की दौलत है
हम पे इतना इताब! क्या मा,नी

 ये गम-ए-हिज्र देन किस की है?
यह मुसलसल अज़ाब क्या मा’नी ?

गैर का एहतराम बेशक हो
हम से ये इज्तनाब क्या मा’नी?

हो ही जायेगा कुछ न कुछ ऐ दिल
इस क़दर इज़तराब क्या मा’नी ?

 वादा-ए-मग़फिरत सलामत है
फिकर-ए-योम-उल-हिसाब क्या मा’नी ?

एहतमाम-ए-हयात है ज़ाहिद
इत्तिहाम-ए-शराब क्या मा’नी ?

 गम के हाथों निढाल है साबिर
ज़िक्र-ए-शे’र–ओ-शबाब क्या मा’नी ?



१ मा’नी = अर्थ २ नक़ाब=पर्दा   इताब=गुस्सा या डांट फटकार  एहतराम=आदर  ५ इज्तनाब= नफ़रत  ६ इज़तराब =बेचैनी  ७ गम-ए-हिज्र विछोह का दुख    मुसलसल= लगातार  ९ अज़ाब दुख या कष्ट  १० वादा-ए-मग़फिरत=मुआफ़ी का वचन  ११ फिकर-ए-योम-उल-हिसाब= उस दिन की फ़िक्र जब कर्मो का हिसाब माँगा जायगा   १२ अहतमाम-ए-हयात है = ज़िन्दगी का प्रबंध १३ ज़ाहिद= संयमी व्यक्ति  १४ इत्तिहाम= तोहमत लगाना

 

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